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अनूठा खजाना कहानी 

यह कहानी एक गांव की है जिसमे आदमी रहता था । वह बड़ा मेहनती और कर्मठ था । कभी भी खाली नही बैठता था । सुबह शाम गए कुछ न कुछ करता ही रहता था । 

The father is taking his child to the fields
(Image credit: Danielle Maclnnes on unsplash)

उसके तीन बेटे थे और तीनों उचे, तगड़े और सलोने थे पर काम करना उन्हें नही भाता था । बाप खेत में, बाग में घर पर भी काम करता था मगर बेटे पेड़ की छाया में बैठे गप मरते रहते । 

“अरे तुम काम कयू नही करते ? बाप का हाथ क्यो नही बटाते?” उसका दोस्त पूछते हुए ।

 “ क्या जरूरत है ?” बेटा जवाब देता है। ‛बापू ख्याल रखते ही है। कुछ दिन बाद ’बेटे बड़े हओ गए। बाप बूढ़ा हो गया ।

अब वह पहले की तरह काम नही कर पाता । घर के बगीचे में और खेत मे भी झाड़ उग आए । यह सब देखते हुए भी बेटो ने कुछ नही किया । 

बूढ़ा बड़ा दुःखी हुए । एक दिन उसने अपने बेटों को बुलाकर उनसे कहा - बेटो! मेरी मदद करो मेरी तो अंतिम घड़ी आ गयी है। 

अब तुम्हे मेरे बिना जीना  होगा। मेहनत करना तुम्हे आता नही । ऐसे सुन बेटो के दिल कप उठे और वो रोने लगे । पिताजी कुछ तो बताइये । 

बड़ा बेटा बोला । ‛अच्छा ' बूढ़े ने कहा । एक राज की बात तुम्हे बताता हूं । तुम्हे पता है, तुम्हारी स्वर्गीय माता और में सारी उम्र दिन - रात मेहनत करते थे।

 बरसो के मेहनत से हमने सोने की मोहरों से भरा एक घड़ा जमा किया है । वह खजाना  मेने घर के पास ही जमीन में गाड़ दिया है । 

पर अब मुझे याद नही की कहा उसे  गाड़ दिया है । अगर उसे ढूंढ लोगे  तब तुम लोग चैन की जिंदगी बसर कर करोगे।

 थोड़ी देर बाद उनके पिता की मृत्यु हो जाती है फिर उनकी चिता को आग देने के बाद।  बड़ा भाई बोला ‛चलो भाइयो खजाना खोजे ।

फावड़े लेकर वे घर के पास खोदने लगते है । लेकिन सोने से भरा घड़ा कही नही मिला । तब मंझला भाई बोला –भाई ! हम ऐसे ही खोदते रहे , तो बापू के खजाना हमे कभी नही मिलेगा । 

चलो घर के चारो तरफ खोदाई करते है । उन्होंने सारी जमीन खोद डाली , पर सोना से भरा घड़ा नही मिला । ‛ नही ऐसे बात नही बनेगी, और खोदना  चाहिए । 

छोटा भाई बोला। पिता का खजाना ढूंढने को सब बहुत उतावले थे । अचानक बड़े भाई का फावड़ा किसी सख्त चीज से टकराई । 

खुसी से उसका दिल उछलने लगा । उसने भाइयो को पुकारा ‛ इधर आओ इधर; बापू का खजाना मिल गया ।
 मंझला और छोटा भाई बड़े भाई की मदद करने लगे। 

 काफी मेहनत के बाद आखिर हाथ लगा। एक भारी पत्थर 'क्या करे इस पत्थर का ?

 इसे ऐसे ही नही छोडेगे चलो इसे फेक देते है । उन्होंने ऐसा ही किया । पत्थर फेककर फिर से जमीन खोदने लगे । 

सारा दिन काम करते रहे, न खाने का  होश न पिने होश रहा , न आराम का । 

पर सोने से घड़ा उन्हें नही मिला। सारी जमीन तो हमने खोद डाली ।

 बड़ा भाई बोला। अब यह खाली क्यों पड़ी रहे । चलो खेती करते है । फिर वो लोग अंगूर के बेल लेकर उनकी खेती करने लगे । कुछ समय बाद अंगूर के पेड़ पर अंगूर के गुच्छे लग गए ।

भाइयो ने अछि फसल उगाई । उसे बेच कर बहुत पैसे कमाए।

तब बड़ा भाई बोला – हमने जमीन बेकार में नही खोदी। हमे वह खजाना मिला गया।

 जिसकी  बात पिताजी ने मरने से पहले कहि थी ।
अनूठा खजाना, इस कहानी से हमे यह सीख मिलती है की मनुष्य का परिश्रम ही अनूठा खजाना है। अतः हमें कड़ी मेहनत करनी चाहिए ।


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