Deepawali | Essay
भारत में हर महीने कोई न कोई त्याहारों आता ही है। Deepawali त्योहार लोगों में उमंग, एकता, उत्साह भर देता है।
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| (Image credit: shaurya sagar on unsplash) |
इन्हीं त्योहारों में से एक त्योहार दीपावली है, जिसे दीवाली और प्रकाशपर्व के नाम से भी जाना जाता है। दीपावली पूरे भरत में हर्षोल्लास से मनाया जाता है।
दीपावली को विदेशों में भी मनाने लगे है। "दीपावली दो शब्दों के मेल से बना है दीप+आवली = दीपावली" दीपावली का अर्थ दीपो की पंक्ति।
दिपावली हिन्दुओ का सबसे बड़ा त्योहार माना जाता है। यह त्योहार कार्तिक मास की अमावस्या को मनाई जाती है। वर्षा ऋतु के बाद जब गंदकी फैल जाती है तो इसी बहाने पूरे घर की साफ-सफाई और लीपा-पोती की जाती है।
घर के अंदर के कूड़े कचरे को बाहर फेका दिया जाता है। बच्चे अपना मिट्टी का घर - घरोंदे बना के मिट्टी के खिलौने से खेलते है।
इस दिन माता लक्ष्मी और भगवान श्री गणेश की पूजा की जाती है। घर के चारो तरफ दीप (जो तिल जैतून या सरसो के तेल से) जलाया जाता है, मोमबत्ती और झालर (छोटे बल्बों को आपस मे पिरोया हुआ) से सजाया जाता है।
अमावस्या की रात होने से चारो तरफ अंधेरा होता है, इस अंधेरी रात में दीपों की छोटी-छोटी प्रकाश की छठा देखते बनता है चारो तरफ रौशनी प्रकाश पुंज की भांति जगमगा उठता है अंधियारा का नामोनिशान ख़त्म हो जाता है।
दीपावली के दिन घर के आंगन में या घर के दरवाजे पे रंगोली सजाई जाती है। यह मान्यता है कि रंगोली माता लक्ष्मी जी को अति प्रिय है, माता लक्ष्मी जी को खुश करने के लिए घर की महिलायें रंग बिरंगी रंगोलियां बनाती है।
इस दिन सभी लोग नये वस्त्र पहनते है, बच्चे फुलझड़ियां और पटाखे जलाते है। जो देखने मे मनोहारी होता है।
सभी लोग अपने मित्रो और परिचितों का स्वागत करते और उन्हें मिठाई खिलाते और उनके सुखी जीवन की शुभकामनाएं भी देते है।
कुछ लोग इस दिन जुआ भी खेलते है, उनका यह मानना होता है कि यह साल उनके लिए भाग्यशाली होगा।
दीपावली के त्योहारों को मानने के पीछे कुछ कथाएं भी है - पहली मान्यता - भगवान विष्णु जी ने राजा बली की कैद से माता लक्ष्मी जी छुड़ाया था।
इसी लिए दीपावली के दिन माता लक्ष्मी की पूजा अर्चना की जाती है और खुशियां मनाई जाती है।
दूसरी मान्यता- भगवान श्री राम चंद्र रावण का वध कर अपनी चौदह वर्ष के वनवास के बाद अयोध्या से लौटे थे।
भगवान श्री राम चंद्र के स्वागत में घी के दीपों से पूरे अयोध्या नगरी को प्रकाशित कर उनका स्वगत किया गया।
दीपावली की रात बाबा, तांत्रिक, ओझा - सोखा अपनी तंत्र देवी की पूजा करते है। इस दिन तंत्र साधना और इसकी सिद्धि भी करते है।
देश के कई जगहों पे दीपावली की रात में माता काली की भव्य पूजन - अर्चन किया जाता है।
दीपावली के दूसरे दिन भोर में भड़वा निकल जाता है। भड़वा निकालने के लिए टूटे हुए सूप - डलिया, टोकरी को अपने धर में और धर के बहार चारों तरफ बजाय जाता है। इसके बाद घरों से दूर सभी महिलाएं इकट्ठा हो के सूप - डलिया, टोकरी आदि को जलती है।
इसके पीछे यह मान्यता है कि इसको जलाने से घर मे मोजूद सभी दुख, दरिद्रता, परेशानी आदि भी जल का खाक हो जयेंगे।
दीपावली के साथ कई त्योहार आते है, दीपावली के दो दिन पहले धनतेरस का त्योहार मनाया जाता है। धनतेरस के दिन लोग सोने चांदी के आभूषणों को खरीदते है। इस दिन लोग सोने चांदी के आभूषणों को खरीदना काफी शुभ माना जाता है।
घर की महिलाएं बर्तन और झाड़ू खरीदती है, धनतेरस को बर्तन खरीदना अनिवार्य माना जाता है।
पूजन के समय घर के सभी सदस्य एक साथ माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा करते है। इसके साथ ही अपने घर के सभी धन संपत्ति की पूजा की जाती है और माता लक्ष्मी का आशिर्वाद प्राप्त किया जाता है।
धनतेरस के दूसरे दिन नरक चतुर्दशी (यमदियरी) का त्योहार मनाया जाता है। इस त्योहार में भगवान यमराज को खुश करने के लिए एक दीपक निकाला जाता है, इस दीपक को सरसों या तिल के तेल से जलाया जाता है इसमें कौड़ी, लोहे का छोटा टुकड़ा और एक सिक्का डाल कर दीपक को जलाया जाता है।
दीपावली त्योहार के दूसरे दिन भैयादूज का तेहवार मनाया जाता है।
पौराणिक मान्यता के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण ने पूरे गोवर्धन पर्वत को अपनी कानी उँगली(सबसे छोटी उँगली) से उठा कर गोकुल वासियो को भगवान इंद्रा के क्रोध से बचाया था।
भैया दूज में घर की महिलाएं इकट्ठा हो के गोवर्धन पूजा करती है और अपने भाई के लंबी उम्र के लिए प्रार्थना करती है। इसके उपरांत अपने भाईयों को मिठाई खिलाती।
इसी दिन भगवान चित्रगुप्त की भी पूजा होती है, कायस्त लोग अपने कलाम-दावत की भी पूजा चित्रगुप्त जी की पूजा के साथ करते है।
दीपावली त्योहार के आने से लोगो का मन आस्था और प्रेम के प्रति रुझान बढ़ता है इससे छोड़े बच्चों में त्योहार के जरिये अपने और अपने धर्म के प्रति आदर भी बढ़ती है।
अच्छी चीजों के साथ कुछ बुरी चीजें भी होती है। दीपावली दिन लोग जुआ खेलते है जिससे किसी का भला नही होता।
जुआ की लत किसी नशे की लत से कम नही। "जुआ खेलने बहुत ही ज्यादा गन्दी चीज है, इसको कभी न छुए"।
दीपावली के दिन लोग ख़ुशी से आतीस बाजी करते है, पटाखे जलाते है। "जिससे ध्वनि प्रदूषण और वायु प्रदूषण दोनों होते है"
कई-कई जगहों पर आतिश बाजिया इतनी ज्यादा कर दी जाती है कि धुंए का पूरा बदल तक बना प्रतीत होता है।
इन पटाखों के इस्तेमाल से कई बच्चे जल जाते है। पटाखे किसी बड़े व्यक्ति साथ ही जलाए। पटाखों का इस्तेमाल कम से कम ही करे अथवा न करे ।
कहानियां - Story in hindi kahani hindi me karj to chukana hoga


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