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Panchatantra ki story fox and stork 

बहुत पुरानी बात है । लोमड़ी और सारस बहुत अच्छे दोस्त थे । एक दिन लोमड़ी सारस को खाने पर बुलाया । उसने कहा सारस में तुम्हारे लिए बहुत अच्छी और मजेदार दलिया बनाऊंगा । सारस ने कहा , ठीक है जरूर आऊँगा। कहकर वह चला गया।

It's snowing and a fox is looking in front
Photo credit:  Funny Foxy Pride from Pexels

दूसरे दिन वह लोमड़ी के घर पहुचा । लोमड़ी उस वक्त सारस के लिए दलिया बना रहा था। जब सारस ने उसके घर का दरवाजा खटखटाया "लगता है मेरा मित्र आ गया"

दरवाजा खटखटाने की आवाज सुनकर लोमड़ी ने सोचा, दलिया जाने कैसी बनी होगी, दरवाजा खोलने से पहले लोमड़ी ने दलिया निकालकर चख लिया। 

दलिया बहुत स्वादिष्ट बनी थी दलिया चख कर लोमड़ी के मन मे धूर्तता आ गया। वह सोचने लगा अगर दलिया सारस को पसंद आ गया तो पूरा चट कर जयएगा।

अगर ऐसा हुआ तो उसके लिए डलिया नहीं बचेगा और वह खा भी नहीं पायेगा। उसने एक तरकीब लगाई, की साँप भी मर जयएगा और लाठी भी नही टूटे। मतलब सारस को दलिया परोसा भी जाए और वो खाने भी न पाये।

चालक लोमड़ी ने ऐसा ही किया। जब सारस अंदर आया तो लोमड़ी ने दलिया को एक तश्तरी में डालकर उसे सारस के सामने परोसते हुए कहा - "लो मित्र ! यह स्वादिष्ट दलिया मेने तुम्हारे लिये बनाया है"

बेचारा सारस उसने बार - बार अपनी चोच उस तश्तरी में डाली खाने के लिए उसकी चोच खाने तक नही पहुँची और उतनी देर में लोमड़ी ने पूरा दलिया चट कर गई। 

"माफ करना दोस्त इस तश्तरी के अलावा मेरे पास कोई और बर्तन नही है । जिसमे में तुम्हे दलिया परोस सकू" और दलिया भी नही बचा, सब खत्म हो गया।

सारस को समझते देर नही लगी कि उसे बेवकूफ बनाया गया है  बोला - "कोई बात नही कभी-कभी ऐसा हो जाता है।" यह कहकर सारस अपने घर की ओर चल पड़ता है।

कुछ दिन बाद जब सरस और लोमड़ी की फिर मुलाकात हुई तो सारस ने कहा - "मित्र! कल मेरा जन्मदिन है, तुम जरूर मेरे घर आना हम दोनों मिलकर खाना खायेगे।" दूसरे दिन लोमड़ी सारस के घर  पहुचा।

सारस ने खाने के लिए सोरबा बनाया था। लोमड़ी को देखकर सारस ने सोरबा को एक तांग मुँह वाले सुराही में डाला और उसे लोमड़ी के सामने परोसते हुए कहा - "लो मित्र! मेरे जन्मदिन की खुशी में यह जायकेदार सोरबा" 

लोमड़ी ने सुराही पर नजर डाली। फिर सुराही के मुंह को सुंघा सुराही के मुँह पर लगा सोरबा चाटा लेकिन सुराही का मुंह लोमड़ी की मुंह से बहुत छोटा था। लोमड़ी चाहकर भी सोरबा नही पी पाया।

Writes by- श्लोक कुमार

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