अपने बच्चों को आप अपने पूर्वजो के बारे में कहानी सुनाये
किसी व्यक्ति को आप कोई मुश्किल चीज बता रहे है, तो उसे कहानी के रूप में बताईये उसे जल्दी समझ में आयेगा।
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| (Image credit: yannis on unsplash) |
कल्पना लोक में पहाड़ो पे तो जरूर चढ़े होंगे, जंगलो में घुमे होंगे, अपने दोस्तो को उसके मुसीबत से कितनी बार बचाये होंगे।
माँ के कहानी में मगन हो कर उस कहानी में सराबोर हो जाते होंगे । लेकिन अब कल्पना लोक का मजा हमारे बच्चों को कहा मिला पता है।
पहले जब कभी गाँव मे लोग इकट्ठा होकर बैठते या शर्दियों के मौसम में आग तापते समय, अक्सर वह छोटे बच्चों को किस्से -कहानियां सुनते थे।
अब किसी को भी इन सभी चीजों के वक्त ही नही है।
मुझे याद है जब में अपने ननिहाल जाता तो वहा दिन भर खेलता, जब रात होती तो हम सभी इकठा हो जाते और नानी से कहानी सुनाते।
पहले परिवार में लोग इकट्ठे ही रहते, तो लोग अपने इस दायित्व को अपने बुजुर्गों के हवाले कर अपने दूसरे कामो को करते।
अब तो अधिकतर परिवार के बहुत से सदस्य इधर - उधर अपने घर से दूर रहते है।
सयुक्त परिवार न होने के कारण माता - पिता को ऑफिस के कामो से फुरसत नही होती।
इसी से वो अपने बच्चों को मोबाइल, कंप्यूटर, टीवी, गेम, आदि देते है।
कहानी सुनाने से बच्चों इंटेलिजेंट बनाते है।
बच्चों का नैतिक और मानसिक विकाश में काफी मददगार साबित होता है।
उनको अपनी संस्कृति, इतिहास और अलग अलग विचारो से परिचित कर सकते है। इससे बच्चों के अंदर रचनात्मकता आती है।
बच्चों को अच्छी या खराब, सही या गलत जैसी भी परिस्थिति हो उससे निकलने का कौशल उनके अंदर अपने आप ही उत्पन्न होने लगता है।
कहानी सुनाने से बच्चों का भावात्मक विकाश अच्छा होता है। समझदारी बढ़ाती है।
बड़े हो जाने पर वह अपने निजी रिस्तो को बहुत अच्छे से निर्वाह करते और सामाजिक रिश्ते भी उनके बहुत अच्छे होते है।
बच्चों को स्कूलों में भी कहानी सुनाई और पढ़ाई जाती है, क्योकि ऐसा करने से बच्चों का मानसिक ज्ञान, नैतिक शिक्षा, सही-गलत में अंतर वो आसानी से करने लगते है।
भावनाओं में भी उनका नजरिया अच्छा बनता है। जैसे दुख की भावना, सुख का अनुभव और प्यार को भी अच्छी तरह से अनुभव करने लगते है।
बच्चों को कहानी सुनाने का महत्व
बच्चों को कहानी खुद ही सुनाना चाहिए। आज कल के परिवेश में समय के अभाव के कारण टीवी, मोबाइल आदि में cartoon दिखा देती है।
ईससे बच्चों में कल्पनात्मक विकाश तो नही होता पर उनके दिमाग मे सब store होता जाता है एक हार्डडिस्क की तरह।
इन सभी चीजों से उलट आप उनको खुद ही कहानी सुनाये।
इससे बच्चों का आप के प्रति रिश्ता और भी मजबूत हो जाता है। उनका काल्पनिक विकाश भी होता है।
अपने पूर्वजों के बारे में कहानी के रूप में सुनाए-
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| (Image credit: linus sandvide on unsplash) |
जिससे उनके स्वाभिमान जैसी भावनाओ का विकाश भी अच्छा होगा।
आप जब भी अपने बच्चों को कहानी सुनाये तो सभी पात्र की जानकारी दे। कहानी हमेशा सरल भाषा में ही सुनाये। जिससे उनको समझने में आसानी हो।
कहानी सुनाते समय उनसे बीच - बीच मे कुछ प्रश्न भी पूछे जिससे बच्चे की एकाग्रता बढ़ेगी और उनको याद रखने की छमता भी अच्छी होगी।
बच्चों से कुछ ऐसी बाते पूछे जो उस कहानी में मौजूद न हो जिससे बच्चों में न दिखाने वाले बिचारो को भी समझने में सहायक होगी।
बच्चों को आज भी कहानी के माध्यम से ही पढ़ाया जाता है। इसके पीछे एक विकाश की कड़ी छुपी है। कहानी पढ़ाई का एक बहुत अच्छा तरीका है। जिसके जरिये बहुत आसानी से बच्चों को फर्क समझया जा सकता है।
जैसे - panchatantra, tenali raman की कहानियां।
- बकरी और तीन चोर
- प्यासा कौवा
- कछुआ और खरगोश
- मगरमच्छ और बंदर
- टोपी बेचने वाला आदि
- बहुत सारी कहानियां है
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