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शिकार का शौक

यह कहानी एक राजा की है, जिसको शिकार करने का बड़ा शौक था। उससके महल की दीवारों पर कई सारे जंगली पशु पक्षियों की खाले टंगी थी। 

एक दिन उस राजा के पुत्र "राजकुमार" ने पूछा कि आप इन सभी पशु पक्षियों का शिकार कर जंगल की खूबसूरती को नष्ठ क्यों कर रहे है? 

deer standing in the forest
(Photo credit: Erik Karits from Pexels)

राजा ने कहा ― बेटे , जो लोग पशु  पंछियों का शिकार करते है वो लोग बहुत बहादुर होते है। हाँ , पंछियो का शिकार करने से जंगल की सुंदरता नष्ठ नही होती बल्कि निर्बल पशु  ― पंछियो को मुक्ति मिलती है

वे आसानी से जंगल की खुली वादियों में विचरण कर सके ।

राजा का पुत्र राजा के जवाब से संतुष्ट नही होता है । वह सोचने लगा  पशु – पंछियो का शिकार करना अच्छी बात नही है

ये आदत तो में छुड़ा कर रहूंगा। दूसरे दिन राजा फिर शिकार करने गया तब पुत्र कहता है – “पिताजी ! में भी चलूंगा शिकार पर.... आपके साथ।”

राजा ने समझाया बेटा ! जंगल मे हमेसा चौकन्ना रहना पड़ता है थोड़ी सी भी लापरवाही मौत का कारण बन सकतीं है। लेकिन पुत्र ने एक न सुनी और वह जिद करने लगा। 

पुत्र को रोते देखकर रानी ने राजा से निवेदन किया की ले जाइए इसे भी तो आपकी तरह ही बहादुर बनाना है यदि यह अभी से ही डरपोक रहा तो बड़ा होने पर दब्बू बन जयएगा। राजा ने पुत्र को भी घोड़े पर बैठा लिया। वो दोनों जंगल मे पहुँच गए ।

तभी राजा को एक भागता हुआ हिरन दिखाई देता है। राजा अपने बेटे से पूछा, बेटा जरा ये बताओ कि यह भागता हुआ हिरण बार-बार मुड़कर पीछे क्यों देख रहा है। 

पुत्र तो इसी इंतेजार में था, की रहा उनसे कुछ पूछे। पुत्र ने कहा पिताजी पहले आप ये बताइए, आप सच्चे छत्रिय है या नही।

राजा ने कहाँ छत्रिय तो है, लेकिन तुम्हारे मन मे ये सवाल कहाँ से आया?

पुत्र ने कहा – हाँ, बस यह भागता हुआ हिरण का बच्चा यही मुड़ - मुड़ कर देख रहा है कि आप छत्रिय है या नही?

तभी राजा ने टोका, यह मूर्ख पशु हमरा छत्रिय धर्म कैसे जानेगा ? पुत्र ने जवाब दिया, यह जनता है कि सच्चा छत्रिय वही है जो भगते हुए किसी शत्रु पर भी प्रहार नही करता। 

अपने पुत्र की यह बात सुनकर राजा का हृदय उसी दिन से बदल गया और राजा ने कसम खाई की शिकार अब से नही करूँगा

पुत्र बहुत खुश था । क्यो की उसने अपने पिता का शिकार करने की आदत को छोड़ा चुका था ।

अतः हमें भी सोचना चाहिए कि हम पशु - पंछियों पर दया करे ।


writer by - Shlok kumar

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