कुम्हार और उसका गधा कहानी
इस कहानी में एक कुम्हार ने बड़े चतुराई से अपने गधे को सामने वाले ठग से कैसे छुड़ाया।
किसी गाँव मे एक बहुत ही गरीब कुम्हार रहता था। उसके पास एक गधा था। उसके परिवार में उसकी पत्नी दो बच्चे और एक माँ थी। इन सभी का भरण-पोषण कुम्हार को ही करना होता।
बहुत सोचने के बाद वो अपने गाँव के एक साहूकार के यहां गया और अपनी सारी बात बताई की वो उसके पास क्यो आया है? साहूकार ने उसे गधा ख़रीदने के लिए कुछ पैसे दिए।
वो रात में बर्तन बनाता और दिन में लोगो का सामान अपने गधे के ऊपर रख कर पहुँचाने का काम करता। उसका और उसके परिवार का भरण-पोषण गधे के माध्यम से अच्छे से होने लगा।
क्याकी कुम्हार के बर्तन कुछ ख़ास बिकते नही थे। कुम्हार भी अपने गधे को खूब खिलता-पिलाता।
एक रात कुम्हार के गधे को किसी ने चुरा लिया।
जब सुबह हुई तो कुम्हार ने देखा कि गधे का खुटा खाली था। पहले तो कुम्हार ने सोचा कि उसका गधा खुटा छुटा के कही भाग गया।
पैसे मिलने के बाद वो जानवरो के बाजार गया और गधा खोजने लगा। कई सारे गधे देखने के बाद, उसे उसका गधा दिख गया।
झगड़े की आवाज सुन कर आस-पास के लोग जुट गए और सारी बाते सुनकर बोले कि सिद्ध करो कि ये तुमारा गधा है।
उस आदमी ने पहले तो दाहिनी आँख बताई और थोड़ी देर बाद बाई आँख बताने लगा कुम्हार ने फिर पूछा कि सोच कर बताओ कौन सी आँख खराब है उसने बाई आँख ही बताई।
आस-पास ही होगा, इसलिए गधे को इधर-उधर खोजने लगा। खोजते-खोजते कई दिन बीत गया अब उसके पास काम तो था, लेकिन गधा नहीं वो काम कैसे करेगा?
उसे एक आदमी बेच रहा था। वो उसके पास गया और बोला ये मेरा गधा है तुमने इसे चुराया है। इसको मुझे दे दो नही तो मैं हल्ला मचाऊगा।
कुम्हार चतुर था अपने गमछे से उसकी आँखों को ढक दिया बोला मेरा गधा एक आँख से नही देख सकता वह कौन सी आँख है? बताओ। अगर ये तुम्हारा गधा है तो तुमको पता होगा कि उसकी को सी आँख खराब है जल्दी बताओ।
फिर कुम्हार ने अपने गधे की आखों से कपड़ा हटा दिया और बोला देख लो भाइयों मेरा गधा बिल्कुल ठीक है। ये दोनों आंखों से देख सकता है।
अब लोग समझ चुके थे और कुम्हार को उसको उसका गधा दे दिया। कुम्हार भी अपने गधे को लेकर अपने गाँव आ गया।
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