ArticleHindi में आप को कई तरह की कहानी जैसे - प्रेम, गांव जवार, बलिदान, सृजनात्मक, वास्तविकता, स्मृतिया, सम्भावना, विनम्रता, हास्य, वात्सल्य, छल, प्रपंच, करुणा आदि की झलक देखने को मिलेगी

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ये hindi story for kids एक ऐसे ऐसे व्यक्ति की है जो इस hindi kahan में अपने जीवन में इतने बड़े बदलाव के होने की उमीद नही किया थी।

वो अपनी पहचान नहीं कर पाता की बचपन और जवानी में इतना बड़ा अंतर आखिर क्यों?

अचानक अपने पिता के साथ चलते चलते ज्योति भूत भूत चिल्लाने लगी। रास्ते मे चल रहे लोग भी ज्योति की तरफ देखने लगे। एकाएक ज्योति चुप हो गई वह समझ गई कि लोग उसे देख रहे है, फिर वह अपने हाथो से इशारा किया और बोला भूत तो आस पास के लोग हँसने लगे।

(Image credit: annie spratt on unsplash)

क्योकि वो जिसे भूत बुला रही थी वो अमरूद था। इतने सारे फल में जैसे आम, सेब, नाशपाती संतरा आदि थे लेकिन ज्योति को तो अमरूद से मतलब था।

ज्योति के पिता जी "भईया अमरूद एक किलो दे दो" तब अमरूद लिया और घर की याद आयी ज्योति की माँ ने चावल लाने के लिए कहा था।

ज्योति के दादा सरकारी नॉकरी में थे ज्योति के पिता का नाम बबलू था बबलू के पिता की नॉकरी होने के कारण पैसे की कभी तंगी नही देखी ।किसी तरह के व्यवसाय की कोई जानकारी नही थी कि व्यवसाय करते कैसे। बबलू की शादी अठारह साल की उम्र में हो गई थी।

इसीलिए उनको बच्चे भी जल्दी हो गए।उन्होंने कई जगह काम किया पर कहीं टिक नही पाये। वो पेन्ट अच्छा कर लेते थे। लोगों के घरों के दरवाजे, खिड़की, दीवार आदि को रंगने का काम चालू किया।

इसी लिए वो घूमते और काम पता करते कि किसी का कोई काम मिल जाये कभी कम मिलता तो कभी नही मिलता। इनके घर की हालत ठीक नही थी घर किसी तरह से चल रहा था। ज्योति की एक बहन और थी उसका नाम सोनम था जो ज्योति से बड़ी थी इसको गुड्डा गुड़िया का खेल बहुत पसंद था।

 बबलू और ज्योति चावल ले कर जब घर गए "मीरा लो चावल लाया हूँ ये अमरूद भी रख दो" अमरूद का नाम सुनते ही सोनम अपने कमरे से दौड़ाते हुए आयी और अमरूद को अपने पिता के हाथों से ले लिया इतने में ज्योति भी लपकी "भूत मेला है हु कीची को भूत नही दूँगी" तोतलाते हुए बोली और छीना झपटी चालू होगी।

संजय आया था तुमसे क्या काम था? क्या उसको तुम्हें पैसे देने है, क्या वह तुम्हें पूछ कर चला गया बोलो।

नही कही पे पेंटिंग का काम करना था सात या आठ दिन का काम है। थोड़ा चाय बना दो चावल का क्या बनाओगी खीचड़ी बना दो। नही आज चावल का खीर बनेगी चाय रहने दो बोलो तो तुम्हें बिना दूध के चाय बना देती हूँ। यही बबलू है जो कुछ किसी चीज के लिए जिद कर देता तो उसके पिता उसका जिद जरूर पूरा करते और आज ?

hindi story for kids - essay writing in hindi निबंध क्या है यह कितने प्रकार के होते हैं

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