ऊंट और सियार
Panchatantra ki ye bahut achhi short story hai is kahani me siyar aur ut ek achhe mitra ho te hai janiye unke sath kaya huaa
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| (Photo credit: Mikhail Nilov from Pexels) |
किसी जंगल मे एक सियार और एक ऊँट रहता था। दोनों में बड़ी गहरी मित्रता थी। दोनों जंगल मे एक साथ रहते थे।
एक दिन सियार को कही से पता चला कि नदी उस पार तरबूज का बहुत बड़ा खेत है। उसने ये बात अपने मित्र ऊँट को बताया।
ऊँट ने कहा मेरे मुंह मे पानी आगया मैं नदी उस पार जाऊँगा। तो सियार ने कहा चलो मैं तुम्हारे पीठ पर बैठ जाऊँगा। तुम नदी पार कर लेना मैं भी तुम पे बैठ नदी पर कर जाऊँगा।
ऊँट ने ऐसा ही किया दोनों नदी पार कर लिए और खेतों में जा पहुंचे वहां पहुँच कर ऊँट और सियार दोनों तरबूज खाने लगे थोड़ी देर के बाद सियार हुआँ-हुआँ करने लगा।
ऊँट ने सियार से कहा मित्र शोर मत करो, खेत के रखवाले आ जायेगे तो मै भाग नही पाऊँगा। सियार ने ऊँट की बात नही सुनी।
वह हुआँ-हुआँ की आवाज करता रहा सियार बोला मित्र मेरा पेट भरने के बाद मुझे गाना - गाने की आदत है। इतने में खेत के रखवाले वहां आगये और सियार भाग गया और बेचारा ऊँट पकड़ा गया।
रखवाले ऊँट की डंडो और लाठियों से खूब पिटाई की और छोड़ दिया। काफी देर के बाद सियार वापस आया बोला चलो कोई बात नही जंगल चलते है।
यह कह कर सियार ऊँट के पीठ पर बैठ गया ऊँट भी नदी पार करने लगा। जब वह गहरे पानी मे पहुँचा तो ऊँट पानी मे गोता लगाने लगा। सियार ने कहाँ मित्र मुझे तैरना नही आता तुम गोता लगाओगे तो मैं डूब जाऊँगा।
ऐसा मत करो तो ऊँट ने बोला की में जब भोजन कर लेता हूं तो में पानी मे डुबकी लगता हूँ ये मेरी आदत है। ऊँट ने जब डुबकी लगाई तो सियार नदी की धारा में बह गया।
इस कहानी से हमे यह सिख मिलती है कि कभी भी अपने मित्र को धोखा नही देना चाहिये। अगर सियार ऊँट को धोखा नही देता तो वह अभी भी जीवित रहता और जब मन मे आता तो दोनों साथ मे तरबूज खाने जा सकते।
desi stories - Story in hindi kahani खाने के लिए जीते है


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