कहानियां इंसानियत
इस कहानी में एक व्यक्ति के स्वभाव और गांव समाज को दर्शाने का प्रयाश किया गया है |
खटिया की ओट लेकर बैठे चाचाजी। उनका कुत्ता मगरुआ जिसको बचपन में सड़क के किनारे से बीमार अवस्था में उठाकर ले आए।
उसे अपने पास रख लिया उसको रहने के लिए एक चबूतरा बनाया। उस चबूतरे में जो मिट्टी लगी वो अपने सिर पे उठाकर के लाये।
चाचाजी का नाम भोला राम। उनके परिवार में उनकी पत्नी प्रेमा देवी उनके दो लड़के बड़े लड़के का नाम मुनीब और छोटे लड़के का नाम मनोज एक छोटी लड़की उसका नाम गुलाबी है।
इनके घर के बाहर नीम का पेड़ है, जिसमे नीम का फल (नीमकौड़ी) जो पक कर टपक रहा था।
गाँव के कुछ बच्चे खेलने के लिए उसे इकठ्ठा कर रहे थे। गाँव में एक सरकारी स्कूल था, बच्चों के पढ़ने का आवाज सुनाई दे रहा था।
प्रेमा बड़े शौक से गुलाबी को सजाती नये कपड़े पहनाती, काजल टिका करती।
भोला साड़ी बुनने का काम करते थे, बने हुए साड़ी को शहर ले जा के बेच देते, इसी से उनके घर का खर्च चलता।
तीन दिन के बाद नागपंचमी का त्यौहार है इस दिन इनके गाँव के बाहर नागपंचमी का मेला लगता है।
इसलिए भोलानाथ जल्दी-जल्दी अपना काम खत्म कर रहा है।
दूसरे दिन भोला गद्दीदार के यहाँ पहुंचा गद्दीदार ने कहा "क्या हुआ कुछ पैसे उधार चाहिए इतनी जल्दी आ गए इसी हफ्ते तो आए थे?"
भोला ने कहा थान तैयार हो गया हिसाब कर दो, हिसाब तो हो जाएगा लेकिन बहुत जल्दी क्या है?
बिटिया के शादी की तैयारी अभी से शुरु हो गई। नहीं ऐसी बात नहीं परसों नागपंचमी के त्यौहार है, हमारे गांव में मेला लगता है।
उसी की तैयारी हो रही है।
अच्छा ठीक है अब आ गए तो नया माल आया है तैयार कर दो और इसको आराम से करना कोई जल्दी नहीं एक महीने बाद भी तैयार कर के लाओगे तो कोई बात नही।
भोलानाथ माल और पैसे लेकर गांव की तरफ चल पड़ा उसने शहर से अपने लिये तंबाकू और बच्चों के लिए कुछ मिठाइयां खरीदी।
जब गांव के बाहर पहुंचा तो मंगरुआ उसी की तरफ देख रहा था। मानो कई घंटो से उसका इंतजार कर रहा हो।
दूर से देखते ही वह दौड़ कर भोला के पास आकर दूम हिलाने लगा और भोला के साथ घर चला आया।
उसी दिन शाम को उसके गांव में एक आदमी आया जो घूम-घूम कर जानवरों को देखता और खरीदने की बात करता।
इस गाँव के सभी लोग दयालु स्वभाव के कारण अपने पशुओं को नहीं बेचे।
वह आदमी पूरे गांव में घूम चुका, कही भी उसका काम नही हुआ।
वह घूमते घूमते भोला के घर की तरफ आया तो घर में एक भैंस और कुछ बकरिया देखा।
बच्चे बाहर खेल रहे थे, बच्चे से बोला घर में कोई है जरा भुला दो बच्चा दौड़ते हुए घर में गया और शोर मचाने लगा मां घर पर कोई आया है और बापू को पूछ रहा है।
भोला थका हुआ था इस लिए प्रेमा खुद ही उठकर गई और बाहर देखा तो एक आदमी उनके भैंस के पास खड़ा है।
उसे छू कर देख रहा है। प्रेमा क्या बात है आप यहां क्या कर रहे है ।
मालकिन में एक व्यापारी हूं मैं जानवरो को ख़रीदने और बेचने का काम करता हूं, मैं आपके जानवर को खरीदना चाहता हूं इसके लिए आपके पास आया हूं।
नहीं हमें नहीं बेचना आप यहां से जाओ। अच्छे पैसे दूंगा जानवर के इसके बदले में जानवर आप खरीद सकते हैं नहीं मुझे नहीं बेचना है जाओ भाई।
मालकिन पूरे दिन मैं ढूंढता रहा कहीं सौदा नहीं हुआ ठीक है मैं पूरे 275 आपको दूंगा।
मेरे हिसाब से यह पैसा इस जानवर के लिए ज्यादा है इसी से मैं सोचा खाली हात वापस जा रहा हूं तो नरम गरम ही सौदा कर लूं।
तभी कुछ गांव की महिलाये उस आदमी को भोला के घर पे खड़ा देखकर इस तरफ आने लगी।
आदमी समझ गया की औरतें आ रही है मेरा बना बनाया सौदा खराब ना हो जाए।
मालकिन आपको सौदा समझ में नहीं आया तो मैं किसी और दिन आपके यहां आऊंगा मैं जा रहा हूं और यह कह कर वह चला गया।
नाग पंचमी का दिन आ गया घर मे प्रेमा पूजा की तैयारी करने लगी। बच्चे मेले में जाने की तैयारी करने लगे।
कुछ बच्चो की आवाज सुनाई देने लगी छोटे गुरु का बड़े गुरु का नाग लो भाई नाग लो तभी बच्चे दौड़ते हुए आए और बोले कालिया नाग बेचने आये है लेलो माई, इसकी मां ने कहा ठीक है बुलाओ बच्चे दौड़ते हुए गये।
प्रेमा झोपड़ी की जमीन, माटी से लीपापोती कर रही थी।
तभी वहां कुछ बच्चे पहुचे तकरीबन वो 5 से 8 साल के रहे होंगे वे नाग पंचमी के फोटो जिसमें नाग के कई रूपो की तसवीर थी और उसने कई देवताओं के साथ भी नागों की तस्वीर थी।
तो बच्चे अपने पास रखे तस्वीरों को बारी-बारी दिखाने लगे। प्रेमा ने कुछ तस्वीर खरीदा और पूजा की तैयारी करने लगी।
शाम को सभी मिलकर मेला देखने चले गए।
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