सै सुनार की एक लोहार की
किसी गाँव में दो दोस्त रहते थे, एक सुनार था दूसरा लोहार था, दोनों दोस्त थे लेकिन दोनों के स्वभाव में बहुत अंतर था। लोहार सीधा और सरल स्वभाव का सरीफ इंसान था लेकिन इसके उलट सुनार आलसी और मक्कार व्यक्ति था।
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| (Photo credit: Pew Nguyen from Pexels) |
सुनार अपनी दुकान बंद कर के शाम को लोहार के घर जाता उससे इधर उधर की बाते करात और लुहार के हाथ का बना हुआ कोई सामान उठा के ले जाता यह इसका रोज का काम था।
इस से लोहार को बहुत नुक्सान हो जाता। इन सभी चीजों को बनाने के लिए गरीब लोहार बहुत मेहनत करता पर दोस्ती के कारण कुछ बोल नही पता ।
एक दिन लोहार ने बड़ी मेहनत से एक बाल्टी बनाई उस बाल्टी को बनाने के लिए लोहा भी उधर ले आया उसने सोचा कि जो समान बनेगा उसे बेच कर उधार चुका दूँगा।
वह सुबह से बनाने लगता है शाम होते होते वो एक बाल्टी बना के तैयार करता है और बाल्टी भी बहुत अच्छी बानी थी। लोहार भी सोंच रहा था कि बाल्टी बिकेगी तो अच्छे पैसे मिल जाएगी। उन पैसे से उधर दे दूंगा और अपने बच्चो के लिए कपड़े खरीद लूंगा यही सोच रहा था।
तभी उसका दोस्त सुनार वहां आ जाता है रोज की तरह इधर उधर की बाते करने लगता है, थोड़ी देर बाद उसकी नजर उस बाल्टी पर पड़ती है।
उसको वो बाल्टी बहुत पसंद आती है। सुनार बोला घर पे जो बाल्टी है वो खराब हो गई है उसमें के जगह छेद हो गया है, मै इस बाल्टी को ले लेता हूं, तुम्हारी भाभी इस बाल्टी को देख कर बहुत खुश हो जाएगी, यह कह कर सुनार अपने घर की ओर निकल पड़ता है।
Write by- Shlok Kumar
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