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कहानी के माध्यम से हम यह जानेगे की हमेशा हमें अपना काम स्वयं करो। हमें कभी अपना काम दुसरो के ऊपर नहीं छोड़ना चाहिए, इससे होगा यही जो इन दोनों कहानी में हुआ है।
chidiya ki kahani
एक खेत में एक चिड़िया घोसला बना के अपने दो छोटे बच्चो के साथ रहती थी। जब खेत का अनाज पाक गया और फसल कटाने का समय हो गया तो चिड़िया को रहने की चिंता सताने लगी।
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| chidiya ki kahani |
एक दिन चिड़िया बहार गई हुई थी तो उसके बच्चो ने किसान और उसके बेटे की बाते सुन कर घबरा गए जब चिड़िया वापस आई तो बच्चो ने कहा की माँ अब यहाँ के चलो कल यह खेत की फसल कट जाएगी।
जब चिड़िया ने बच्चो से पूरी बात पूछी तो उन सभी बच्चो ने अपनी माँ को सारी बात बताई, की किसान और उसका बेटा क्या बाते कर रहे थे?
किसान और उसके बेटे ने कहा की चलो पड़ोसियो से कह देते है, की हमारा भी फसल भी काट दो, हमारे खेत की भी फसल पक गई है। माँ कल इस खेत की फसल कट जाएगी।
माँ यहां रुकना ठीक नहीं है, चलो माँ यहाँ से चलो चिड़िया ने अपने बच्चो को समझाया की डरो मत कल पडोसी खेतो की फसल को कटाने नहीं आएंगे।
तीन दिन बाद चिड़िया जब बहार गई तो किसान खेतो पे फिर आया उसने देखा की फसल अभी नहीं कटी है।
किसान अपने बेटे से बोला फसल ज़्यदा पक गई है, पडोसी नहीं आये खेत के फसल को कटाने खेत वैसा ही पड़ा है।
चलो भाइया से हम कह दे की हमारे खेत की फसल काट दो, जब शाम को चिड़िया वापस आयी तो बच्चो ने सारी बात अपनी माँ को बताई।
की किसान फसल कटाने के लिए अपने भाई को बोलेने गए, कल फसल कट जाएगी। इन सभी की बात सुन कर चिड़िया ने कहा "बच्चो डरो मत कल फसल नहीं कटेगी"।
यही हुआ उसका भाई भी फसल को कटाने नहीं आया।
चार दिन तक कोई भी नहीं आया चार दिन बाद किसान और उसका बेटा फिर खेत पर आये और देखा फसल वैसे की वैसे पड़ा हुआ है। अब क्या करू फसल ज्यादा पक गई है। अब फसल ख़राब हो जाएगी हमको इसे खुद ही कटनी होगी।
चिड़िया वापस आयी तो बच्चो ने सारी बात चिड़िया को बताई की किसान अब कल खेत कटाने खुद ही आएगा।
चिड़िया ने कहा की अब हमें देर नहीं करनी चाहिए, कल य खेत की फसल कट जायेगा किसान फसल कटाने जरूर आएगा, अब हमें खेत छोड़ देना चाहिए।
अतः चिड़िया ने खेत को छोड़ दिया और दूसरे दिन किसान और उसका बेटा अपने खेत की पूरी फसल काट दिए।
zamindar ki kahani
किसी जमाने मे एक बड़ा जमींदार था। उसके पास बहुत सी जमीने थी और बहुत से नौकर-चाकर भी उसके खेतो में काम किया करते थे।
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| (Image credit: hakan nural on unsplash) |
जमींदार का मुनाफा दिन प्रतिदिन घटता ही जा रहा था।
एक दिन उनके घर उनका एक दोस्त घर आये। जमींदार बातों-बातों में उनसे अपनी सारी समस्या बताई। थोड़ी देर सोचने के बाद इनके मित्र में पूछा कि आप अपने खेत पर कब गए, इनको याद हो तो बताये इनको याद ही नही था।
फिर इनके मित्र ने पूछा तुम्हारे खेत मे कितने लोग काम करते है। इनको कुछ पता तो था नही। इनके मित्र ने कहा तुम्हारे खेत मे काम करने के लिए क्या क्या समान है। इनको कुछ समझ नही आया कि क्या कहु।
ये बोले मुझे नही मालूम। जमींदार के मित्र ने कुछ सलाह दिया, बोला "पहले तुम रोज उठो और सुबह सुबह अपने खेतों पे जाओ"। वहाँ देखो की कितने लोग काम कर रहे है और कौन काम नही कर रहा है।
खेतो में काम करने के लिए जरूरी चीजों की व्यवस्था करो। अगर ऐसा करोगे तो तुम्हारी खेती में मुनाफा ही नहीं दो गुना मुनाफा होगा। जमींदार को बात समझ में आगयी।
वह दूसरे दिन सुबह - सुबह उठ कर खेतो पे गया। वहा आधे लोग आए ही नही थे, जो लोग आए थे उनमें से कुछ लोग सो रहे थे। फिर उसने खेती के उपकरण देखा तो कुछ बचे थे उसमे से अधिकतर खराब हो चुके थे।
उस समय जमींदार कुछ नही बोला। बस उन लोगो को कहा जो लोग खेत मे काम करना चाहते है वो शाम को मेरे घर आ जाये।
इधर खेती के उपकरण भी मंगवा लिए शाम को जब सभी लोग उनके घर पहुचे तो जमींदार ने उनसे कहा कि अब से में रोज आप लोगो के साथ खेतों पे रहुगा। जो लोग ईमानदारी से काम नही करेंगे उन्हें खेतो पे आने की जरूरत नहीं है।
उस साल जमींदार साहब की खेती से मुनाफा दो गुना से भी ज्यादा हुआ।
इस कहानी से हमे यह शिक्षा मिलती है कि हमको अपना काम स्वयं करो अपने व्यापार को दूसरों के हाथों नही देना चाहिए।
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Oknisha
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