कुछ लोग जीने के लिए खाते है तो कुछ लोग खाने के लिए जीते है। इस में यह कहावत तो सही बैठती है।
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| (Image credit: usman yousaf on unsplash) |
बहुत समय पहले की बात है एक छोटा सा गाँव था। उस गाँव की एक खास बात थी कि वो गाँव जिस राज्य में था उस राज्य मे कभी कोई दैवीय आपदा जैसे अकाल, सूखा आदि नहीं पड़ा।
वहां के लोग ये मनाते था कि उनके देश में भगवान इन्द्र की बड़ी कृपा है। क्योकि राजा हर साल भगवान इंद्रा की पूजा पाठ हवन आदि कराते। जिससे भगवान इन्द्र प्रसन्न रहते, और पूजा के उपरांत दो सप्ताह पूरे राज्य में जितने भी बुजुर्ग है उन्हें राजशाही भोजन की व्यवस्था उनके किले में एक बड़ा मैदान था उस मैदान में उनके लिए राजा की तरफ से उनके रहने के लिए तंबू और उनके मनोरंजन के लिए नृत्य अथवा गायन आदि की यवस्था होती।
बुजुर्गो के स्वास्थ्य के लिए राज बैद्य और उनके सहायक हमेशा तत्पर रहते थे। इसी तरह दो हफ्ते किस तरह बीत जाते पता नही चलता और वापस आते समय वो सभी राजा को धन्यवाद और आशिर्वाद देते।
अपने घर आने पर बुजुर्ग भगवान से ये प्रार्थना करते कि भागवन हमे एक बार और वहा जाने का मौका दीजियेगा हमे जीवित रखियेगा। कुछ लोगों का मानना यह था कि राजा की व्यवस्था से बूढ़े बिगड़ जाते है लेकिन सोच के चुप हो जाते कि वो भी बूढ़े होंगे राजशाही भोजनालय का भोजन ग्रहण करने का अवसर उनको भी मिलेगा।
लेकिन समस्या तो यह होती कि किसी भी बुजुर्ग को अब कुछ दिन तक घर का खाना पसंद नही आता तो किसी तरह से भोजन करते और कर भी क्या सकते।
सब ठीक चल रहा था तभी एक साल उनके देश मे जबरदस्त आकाल पड़ गया। वर्ष नही होने के कारण अन्न नही हुआ ,नदी, तालाब, पोखर सब सुख गया, घास आदि भी सुख गया हाहाकार मच गया पशु पक्षी ने गांव छोड़ना आरम्भ कर दिया।
अब गांव वाले भी अपना गांव छोड़ने की तैयारी करने लगे। राजा व्याकुल हो उठा उसे समझ नहीं आ रहा था कि आगे क्या करूं अपने राज्य की दुर्दशा देखी नही जाती।
अब राज्य को कैसे चलेगा।
अब कहानी को आगे बढ़ाते है, राजा ने अपने राज्य सभा में अनेक विद्वानों पंडितो और ज्योतिषो को अपने दरबार में बुलाया इस विषय में सलाह मांगी। वह सभी आपस में सलाह करने लगे उनको अकाल का कारण समझ नहीं आ रहा था।
एक विद्वान ने कहा पड़ोसी राज्य से मदद मांगी जाए वहां का राजा आपका मित्र भी है वह हमारे राज्य की मदद अवश्य करेगा। राजा ने उस विद्वान व्यक्ति की बात को माना और अपने पड़ोसी राज्य को संदेश भेजा।
संदेश पा कर राजा के मित्र ने भी बखूबी अपनी मित्रता निभाई। उसने अपने अनाज के गोदाम से बोरी भर भर कर अनाज भेजा। पानी के लिए गहरे कुएं खुदवाये। इलाज के लिए जड़ीबूटी भेजी जिससे वहा के लोगों का इलाज हो सके। अकाल के कारण परेशान लोगों का अब धीरे-धीरे गुजर-बसर चलने लगा । राजा ने अपने मित्र राज्य को धन्यवाद दिया और आभार प्रकट किया।
कुछ दिन बाद बारिश हुआ और सब कुछ पहले के जैसा चलने लगा। चारो तरफ हरियाली हो गई धीरे धीरे पशु पक्षी वापस आने लगे। आपको हमारी कहानी कैसी लगी ?
सेवा का नाम सुनते ही आप के मन मे ईस्वर की छवि बन जाती है अपने बुजुर्गों का सेवा भी ईस्वर सेवा से कम नही होती
आप भी कहानियां लिखने के शौकीन है तो आप अपनी कहानी हमे भेजिए हम आप की कहानी अपने ब्लॉग पर लगाएंगे।
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