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विरासत-life of pie

पूरी दुनिया मे एक समय ऐसा भी था जब मनुष्य मनुष्यता के पायदान पर खड़ा होने के जद्दोजहद में अपनी कश्मकश भारे जीवन को जीने की कोशिस में जो जुझारू पन के रुतबे को बरकरार रखने में कामयाब हो गये।

जिसके परिणाम स्वरूप हम और आप चैनओ-आनंद की जिंदगी बसर कर रहे है। 

हम लोग चाँद को देखते-देखते मंगल पे पहुँच गए कही न कही प्राकृत ने जो हमे जीवन दिया और हमारे जीवन को जीवित रखने केलिए आश्रयदाता के रूप में हमारे साथ है। 

इसने जो हमे सिखाया है इससे बड़ा गुरु कोई नही।

In the river, a drop of water above a leaf looks like a pearl
(Image credit: aaron burden on unsplash)

क्या यह रातो-रात हुआ होगा आप क्या कहते है मेरे हिसाब से तो नही। क्योकी इतिहास रातो-रात नही बदलती यह तो इतिहास से भी पुरातन काल की बात है।

आइये हम एक सफर पर चलते है की दुनिया मे आदिमानव का अस्तित्व तकरीबन हजारों साल से भी पुरानी है।

शुरू में जब पत्थरो के युग पाषाण काल मे आदिमानव पत्थर से ही अपने जीवन को सरल बनाने में कामयाब हुए और वे लोग गुफाओ में उसी पत्थर के टुकड़े से पत्थर की कंदनाओ को खुरच-खुरच के अपने शिकार करने के तरीके और अपने उन सभी हुनर को चित्रों के माध्यम से अगली पीढ़ी तक पहुँचाया।

उसी पत्थर के टुकड़े को आपस मे रगड़ के आग की उत्पत्ति की। पत्तियों और जानवरों के खाल पहने लगे पका हुआ भोजन करने लगे।

 यहाँतक की अनाज भी उगाने लगे धीरे-धीरे पशु पालन शुरू किया गाँव बसाने लगे।

बदलाव तो तब आया जब उन्होंने पत्थर के पहिये बना लिए तैयार पहिये ने उनके जीवन की रफ्तार को तेज कर दिया। उसके बाद उन्होंने जाने क्या क्या बनाया जैसे मिट्टी के बर्तन घोड़ागाड़ी आदि।

मोहनजोदाड़ो हड़प्पा ईन सभी सभ्यताओं में तो धातु की मूर्तियां तक प्राप्त हुई और वो भी यही चाहते थे कि उन्होंने जो कुछ भी सीखा वो अपने अगली पीढ़ी तक पहुँचे।

भाषा और बोली दोनों एक दूसरे के पूरक है जरा सोचिये मानव ने जो पहला शब्द बोला होगा वह क्या बोल होगा जो लिखा होगा वह क्या लिखा होगा।

मुझे लगता है नालंदा विश्वविद्यालय अगर जला नही होता तो हो सकता है कि अब हमारे पास उन सभी महापुरषो के हाथों लिखी सभी बेस-कीमती भोजपत्र और किताबे होती।

 क्योकि पहले की एक लेख में यह बताया गया है कि सबसे ज्यादा इंसानो के मृत्यु का कारण एक बहुत छोटे जीव होगा।


अगर उन्हें यह बात पता थी तो इसका उपाय भी वह जरूर जानते होंगे।

जरा ऐसे सोचिये की हमारे भारत के महान ज्ञानी पुरुषों ने जाती-पति का बंधन क्यो बनाय राज करने के लिए मेरे हिसाब से जी नहीं। 

जहाँ तक मुझे मालूम है कि पूरे विश्व मे अगर कोई महामारी फैलती तो भारत मे उसकी रफ्तार क्यो कम हो जाती है। इसका उत्तर उसी जाती-बिरादरी में छुपी है। 

मेने कही सुना था जो डीएनए की चेन को सहेज कर रखने के लिए ये पूरी व्यवस्था की गई उसके यही करण है।


हमारे भरत देश को फिर से वही सोने की चिडियाँ बनाने की हर एक मुमकिन कोशिस करनी होगी।

 हमारे देश को लोग हरियालिओ का देश कहने लगे गूगल मैप जब खोले तो सब हरा-हरा ही दिखाई दे।


पृथ्वी पे रहने वाले हर एक मनुष्य के पूरे मानव जाति का ये परम कर्तव्य है पेड़ों से पृथ्वी को भर दीजिये। 

कभी न खत्म होने वाले सौर्य ऊर्जा के संसाधनों का उपयोग करिए। 


आने वाली पीढ़ी को हम क्या यही देगे।

पर्यावरण की यह दुर्दशा, ग्लोबल वार्मिग जल प्रदूषण, वायु प्रदूषण, मृदा प्रदूषण, रेडिएशन,

आप को पता है पहले एक कुआँ होता तो पूरा गाँव उस कुँए का इस्तेमाल करता लेकिन अब हर दूसरे घर मे बोरिंग की व्यवस्था है।
 अब लगभग सभी घरों में कम से कम एक वाहन तो अवश्य ही होता हैं।

कल्पना करना मुश्किल है ऐसे ही चलता रहा तो पानी जो प्रकृति का अनमोल उपहार है उसे हमको आज खरीदना पड़ रहा है ।

हो सकता है की उसी तरह आने वाले समय मे सभी घरों में एलपीजी पाइप लाइन की ही तरह ऑक्सीजन पाइप लाइन की व्यवस्था हो जाएगी। तो उस समय प्रकृति का क्या हाल होगा मैं सोच कर ही कांप जाता हूँ।

ऐसा मुझे लगत है माफ़ी चाहुँगा इसमें कुछ गलती हो तो सुधारा जा सकता है आप हमारा सहयोग करे धायनवाद


life of pie - Story of village | Hindi Interesting story

आप भी कहानियां लिखने के शौकीन है तो आप अपनी कहानी हमे भेजिए हम आप की कहानी अपने ब्लॉग पर लगाएंगे।





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