बिल्लू गिलहरी | कहानी
इस कहानी में अपने परिवार को बचाने के लिए छोटी सी गिलहरी ने क्या? जानवरो की कहानी जिसमें सच्चाई की जीत हुई, बुरे को अपने किये गए कर्मो का फल मिला।
एक बहुत घना जंगल था। उस जंगल के बीच मे एक तालाब था, तालाब में रोज जंगल के सभी जनवार पानी-पीने आते।
उसी तालाब के किनारे बहुत पुराना बरगद का पेड़ था। वह पेड़ जंगल का सबसे बड़ा पेड़ था। वह पेड़ बहुत सारे जीवो का आशियाना था, जिसमे सभी जीव बड़े मजे से रहते थे।
इसी पेड़ पर बिल्लू गिलहरी का परिवार रहता था। इस पेड़ पर बद्री नाम का बंदर भी रहता। उस पेड़ पर कई सारे चिड़ियों के झुंड का डेरा भी था।
पेड़ के पीछे की ओर एक और पेड़ था। उस पेड़ के नीचे की ओर एक बिल था। उस बिल में सुलेमान नामक सांप रहता था।
उसकी नजर बिल्लू के परिवार पर थी। सुलेमान ने कई बार कोसिस की, पर चीकू नाम का खरगोश बिल्लू को बात देता की सुलेमान आ रहा है।
बिल्लू झट से पेड़ पर चढ़ जाता और अपने बिल में छुप जाता और सुलेमान साँप पेड़ पर चढ़ कर बिल्लू के बिल में घुसने की कोशिश करता मगर बिल्लू किसी तरह से अपनी और अपने बच्चों का जान बचाने में कामयाब हो जाता।
राजा कहा कि क्या हुआ? बिल्लू ने कहा महाराज हमारे पेड़ के पीछे एक साँप रहता है। जो हमारे परिवार के पीछे पड़ हुआ है।
जब हम दोनों खाना ढूंढने अपने बिल से बहार जाते है तो सुलेमान साँप धीरे से पेड़ पर चढ़ जाता।
भला हो उस बंदर का जो साँप को भाग देता है । मेरे बच्चो की जान बच जाती, अगर किसी दिन उसका ध्यान इधर-उधर हुआ तो हमारे बच्चों को सुलेमान साँप मार देगा।
राजा ने कहा कि तुम बिल्लू गिलहरी के परिवार को परेशान करते हो, अब से यह सब बंद कर दो। यहाँ पे यह सब नही चलेगा।
अगर दोबारा ये बात सुनाई दिया, कि तुम बिल्लू के परिवार के आसपास भी दिखाई दिए। तो मै तुम्हारे साथ क्या करुगा ये तुम अच्छे से जानते हो?
क्या बात है? राजा ने कुछ बोल है क्या? चालक सेन ने बोला राजा ने कुछ नही कहा, बस मै तुमसे मिलने आया हूँ। तुम मेरा एक काम कर दो, तो में तुम्हे बिल्लू को मारने में मदद कर सकता हूँ। सुलेमान साँप तो सोच ही रह था कि बिल्लू का क्या करूँ? साँप ने कहा मुझे क्या करना होगा? चालक सेन बोला कल बताउगा।
दूसरी रात चालक सेन साँप को महामंत्री भालू के घर ले गया। उससे बोला तुम्हे भालू को कटाना होगा। भालू को मारने के लिए साँप ने चुपके से सोते हुए भालू को काट लिया और दोनों वहा से चले गए। अगले दिन सभा मे सभी पहुँचे पर महामंत्री भालू नही पहुचे।
कई घंटों के बाद कौआ वापस आया। राजा से बोला, महाराज में महामंत्री के घर गया तो वह घर पे नही थे। अगल बगल से पूछताछ भी की लेकिन किसी को उनके बारे में पता नही था।
कुछ दिन ऐसा ही चलता रहा। एक दिन अचानक सोनू और बिल्लू भालू के साथ सभा मे पहुचे। राजा ने पूछा क्या हुआ, बिना बताए कहा चले गए थे भालू।
भालू ने कहा कि महाराज मुझे साँप ने काट लिया। बिल्लू और सोनू ने मेरी जान बचाई मुझे सुरक्षित स्थान पे रखा।
उसने बिल्लू को बुलाया, बिल्लू ने मेरी जड़ी बूटी से मेरा इलाज किया। यह सुनते ही राजा ने कहा चालक सेन क्या ये सही बोल रहे है।
चालक सेन बहुत चतुर था। वो बोला नही महाराज ये सब गलत बोल रहे है। हाँ सुलेमान को में जनता हूँ और सुलेमान मेरा दोस्त है। लेकिन मुझे नही मालूम उसने ऐसा क्यू किया?
तब भालू ने कहा महाराज चालक सेन ने मुझे कोई नुकसान नही पहुचाया बस साँप को सजा दी जाय।


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