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खटाई

एक छोटे से बच्चे की जो अपने जीवन की दुसवारियो को जीने की तैयारी कर रहा है।


Father and son are both sitting on the beach
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खटाई 7 से 8 साल का एक छोटा लड़का हैं। अपने पिता को शराब पीते और माँ से झगड़ा करते अक्सर देखता।

इसके पिता कोई काम नहीं करते। ये अपने शराब की व्यवस्था बड़े मेहनत से करते। यह शाम होते ही सड़क पे निकल जाता और तने भी शराब पीने वाले लोग है वह उनका शराब ले के आते और उसमे से थोड़ा इसको भी मिल जाता। 

क्योंकि दुकान बहुत दूर था इससे इसके नशे की खुराक पूरी हो जाती यह इसका रोज का काम था।

इसके घर का खर्च इसकी माताजी उठाती। दूसरों के घरों में काम करती और घर आते वक्त खानेपीने का सामान ले आती, और कभी कभी किसी के यहां खाना मिल जाए तो उसे अपने साथ ले आती सभी लोग मिल कर खा लेते।

सब इसी तरह चलता रहा। एक दिन खटाई के पिता कि अचानक मौत हो गई। बेचारा छोटा सा बच्चा उसे तो कुछ समझ ही नहीं आया की क्या हुआ?

उसके पिता का सारा क्रिया कर्म उनके भाई और भतीजे ने किया। उसको समझ मे तब आया जब दसवाँ और तेरही बीत गया और सभी लोग अपने घर लौट गए।

वह एकांत में बैठ कर रोता इसके सिवा कोई चारा भी नही था। क्योंकि इसकी माँ जब काम करने जाती तो इसे कमरे में बंद कर के अपने काम पे जाती क्योकि उसे कई जगह काम करने जाना होता।

खटाई को अपने पिता की याद तब आने लगी जब वह एकांत कमरे में बंद होता और सोचता कि उसके पिता उसे कितना प्यार करते। उसे कभी भी अकेला नहीं छोड़ते उसे याद आती थी की कंधे पर वह बैठ कर पूरे मोहल्ले की सैर करता।

शराबियों के पास से जो खाने का सामान मिले वह उसे खाता नहीं अपने बच्चे खटाई के लिए लेकर आता।

एक दिन जब शुक्ला जी के यहां काम कर रही थी तो अलका शुक्ला जी के घर गई अलका छोटे बच्चों को पढ़ाने का काम करती थी। उसने शुक्ला जी से कहा कि चाचा जी आप के यहां छोटे बच्चे हो तो मैं पढ़ा दूंगी उसे मेरे घर भेज दीजिएगा।

शुक्ला जी बोले मेरे बच्चे तो बड़े हो गए हैं सब अच्छे जगहों पर काम कर रहे हैं उस वक्त खटाई की मां बाहर निकली शुक्ला जी की नजर पड़ी तो वह बोले अरे तुम्हारा बच्चा तो छोटा है तुम अपने बच्चे को अलका के घर छोड़ देना यह पढ़ा देगी और इसके पैसे मैं दे दूंगा।

शुक्ला जी सरकारी विभाग के रिटायर थे अफसर थे। उनके बच्चे भी बहुत अच्छे पोस्ट पर थे। दूसरे दिन अलका के पास उसे छोड़ कर चली गई जब वह पहुंची तो इसके घर के पास की एक लड़की भी पहुंची उसका नाम बबुनी था। घर वापस जाते समय खटाई के साथ बबुनी को भी साथ ले गई क्योंकि उसका घर रस्ते में ही पड़ता था 

दिन तक ऐसा ही चलता है एक दिन अलका ने उस पर मां को बुलाया और बोला कि तुम्हारे लड़के को कोई भी काम नहीं करता है इसको कोई काम पूरा नहीं होता। मेने इसे डॉट दिया तो यह गालियां देने लगता है। ठीक है दीदी मैं इसको समझा दूंगी गाली नहीं देगा इतना बोल कर वहां से चली गई।

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