जादुई चक्की story
यह कहानी जादुई चक्की (jadui chakki) बहुत पहले की है एक गाव में एक किसान रहता था।
उसके दो लडके थे बड़ा बेटा राजेश जो बहुत चालक और धूर्त था। छोटा बेटा रमेश ईमानदार सरीफ और सीधा था।
वह पूरा दिन खेतो में काम करता था। और उसका भाई राजेश हमेशा घर पे सोता रहता।
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| (Image credit: ansgar scheffold on unsplash) |
एक दिन उनसे पिता की मृत्यु हो गई पूरा गाव जुटा। उनका क्रियाक्रम करने के बाद बड़ा भाई ने बड़े चालाकी से अपने छोटे भाई का सारा हिस्सा छीन लिया।
उसको केवल एक झोपड़ी दिया उस झोपड़ी में छोटेभाई अपनी पत्नी और बच्चो के साथ रहने लगा। वह दुसरो के यहाँ काम कर के अपने घर का गुजरा बड़ी मुश्किल से कर पता था।
दीपावली का दिन था छोटे भाई के यहाँ खाने पीने को कुछ नहीं था, तो उसकी पत्नी ने कहा की अपने भाई से कुछ मदत मांग लो।
छोटा भाई बड़े दबे मन से अपने भाई के घर गया वहां उसके बच्चे नए कपडे पहने हुए थे और मिठाईया खा रहे थे।
छोटे भाई ने अपने भाई ने कुछ पैसे मगे तो उसने सीधे ही मना कर दिया की मेरे पास पैसे नहीं है।
में कहासे पैसे दू तुमको जाओ यहाँ पैसे मांगने मत आना। छोटा भाई मुँह लटका के वहा से चला गया, रस्ते में एक बूढ़ी दादी लकड़ी का गट्ठर लेके चल रही थी।
तो छोटे भाई ने उस गट्ठर को उठालिया और सोचा इस गट्टर के बदले दादी कुछ पैसे दे देगी।
छोटे भाई ने गट्ठर को दादी के घर पंहुचा दिया दादी ने उनको चार रोटी ले के आयी बोली की तुम घबराओ मत।
तुम गांव के बहार नदी के किनारे बेर के पेड़ के पास चार बौने रहते है उनको ये मीठी रोटी दे देना और उसके बदले में पत्थर की चक्की(jadui chakki) मांग लेना।
तुम्हारा किस्मत बदल जायेगा।
छोटे भाई ने वैसा ही किया, वह बौनों से चक्की मांग लिया बौने चक्की देते समय यह बताई की तुम इस चक्की को मामूली चक्की मत समझो।
ये जादुई चक्की है, इस चक्की से कुछ भी मागोगे तो वह इसमें से लगातार निकलने लगेगा और रुकता नहीं।
इसको रोकने के लिए तुमको लाल कपड़ा से इसको ढकना होगा। तो यह रुक जाएगी नहीं तो ये चलती ही जाएगी।
छोटे भाई ने जादुई चक्की (jadui chakki) को अपने सर पे उठा के घर ले आया।
घर पे पत्नी इंतजार कर रही थी छोटे भाई ने कहा की यहॉ एक कपड़ा बिछा दो और एक लाल कपड़ा लाओ।
छोटे भाई ने बरी बरी से सभी कुछ निकला पहले चावल निकाली दाल निकाली घर में भोजन बना सभी मिल कर भोजन किया।
जो भी अनाज बचा उसे सुबह बाजार में बेच के कुछ पैसे भी ले आया।
अब छोटा भाई बोरे में अनाज भर के बाजार में बेचा कर आता। इस तरह उसकी धीरे धीरे हालत सुधरने लगी।
अब वो अपना बड़ा सा माकन बनवा चूका था और उसका जीवन मजे से चल रहा था।
अब बड़े भाई को ये सब चुभने लगा इस लिए वो चुपके से उसके घर में झाकने लगा तो देखा की उसका चक्की के पास बैठ कर चीजे मांग रहा है।
इसको ये समझते देर नहीं की मेरे भाई को आगे बढ़ने का कारण यें चक्की ही है।
मौका पाके बड़े भाई में जादुई चक्की (jadui chakki) चुरा लिया।
वो अपने पत्नी से कहा की हम सबको यहाँ से जाना होगा। वह नहीं चाहता की उसका भाई ये जान पाए की चक्की उसी ने चुराई है और इतने में सभी तैयार हो के घर से निकल पड़े।
गाव के बहार सागर के पास एक नाव वाले से नाव खरीदी और उसमे सभी बैठ कर जाने लगे।
नाव जब गहरे पानी में पंहुचा तो उसकी पत्नी ने कहा की ये चक्की क्या कर सकता है, दिखाओ बड़े भाई ने चक्की से नमक मांगा तो चक्की चलने लगी और नामक निकलने लगा।
अब चक्की को रोकने का तरीका तो पता नहीं था, चक्की लगातार नमक निकलता रहा। नाव मेंं ज्यादा वजन होने की वजह से नाव सागर में डूब जाती है।
इन सभी की मृत्यु हो जाती है। और जादुई चक्की (jadui chakki) अभी भी चल रही होगी।
life of pie - short moral story on value of time


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